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धर्माचार्यों की भावनाओं का सम्मान जरूरी, तुष्टिकरण स्वीकार्य नहीं: भट्ट

कुंभ क्षेत्र में गैर हिन्दू प्रवेश मुद्दे पर कांग्रेसी आपत्ति, तुष्टिकरण की नीति हिस्सा : भाजपा

धर्माचार्य, पुरोहितों की पूर्व से स्थापित भावनाओं का सम्मान करे कांग्रेस : भट्ट

सुखवंत आत्महत्या प्रकरण में कमिश्नरी जांच जारी, कांग्रेस को विरोध के बहाने की तलाश

देहरादून 16 जनवरी।
भाजपा ने कुंभ क्षेत्र में गैर हिन्दू के प्रवेश चर्चा पर कांग्रेसी आपत्ति को उनकी तुष्टिकरण नीति का हिस्सा बताया है। वहीं अंकिता भंडारी प्रकरण मे मुँह की खाने के बाद अब वह विरोध के लिए बहाने तलाश रही है।

पार्टी मुख्यालय में पत्रकारों के सवालों का जवाब देते हुए प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट ने कहा कि हरिद्वार कुंभ क्षेत्र में गैर हिन्दू प्रवेश मुद्दे पर सनातन भावना का सम्मान होना चाहिए। क्योंकि इसको लेकर जो विपक्षी आपत्तियां हैं वह सब तुष्टिकरण की राजनीति से प्रेरित है। यह नियम तो वहां पहले से ही स्वतः स्थापित है, लिहाजा सभी को धर्माचार्यों और स्थानीय पुरोहित समाज की परंपराओं का पालन करना चाहिए। उन्होंने कहा कि जब मक्का मदीना जैसे धर्मस्थलों में गैर मुस्लिम प्रवेश वर्जित है तो सनातनियों की भावनाओं को भी सम्मान दिया जाना चाहिए। क्योंकि कोई गैर हिन्दू पुण्य पाने की भावना से संबंधित क्षेत्र में गंगा स्नान नही करेगा। उन्होंने कहा कि वहां स्नान कर जो हिंदू धर्म अपनाना चाहता हो, उसके अतिरिक्त अन्य सभी को वहां प्रचलित नियमों के पालन में दिक्कत क्यों है?

उन्होंने कहा कि किसान आत्महत्या प्रकरण पर विपक्ष द्वारा राजनीति का आरोप लगाते हुए कहा कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देश पर सख्त कार्रवाई कर, मैजिस्ट्रेट जांच शुरू हो गई है। जिसमें कुमायूं कमिश्नर द्वारा सभी संभावित आरोपियों और पक्षों से पूछताछ की जा रही है। लिहाजा सभी को शंकाओं को दरकिनार कर, जांच नतीजों का इंतजार करना चाहिए। उन्होंने कांग्रेस नेताओं के बयानों पर निराशा व्यक्त करते हुए कहा, मुद्दाविहीन पार्टी प्रत्येक मुद्दे को राजनीति से जोड़ने की कोशिश कर रही है। जबकि ऐसे कई संवेदनशील और गंभीर प्रकरण हैं जिनका सरकार की कार्यप्रणाली से सीधा सीधा संबंध नहीं है। लेकिन कांग्रेस नेता चुनाव की दृष्टि से, सरकार को बदनाम कर अपनी राजनैतिक दुकान चलाने की कोशिश में लगे रहते हैं।

उन्होंने अगस्त्यमुनि की घटना पर भी स्पष्ट किया कि विधानसभा उप चुनाव के समय मुख्यमंत्री ने वहां 20 करोड़ की लागत से स्टेडियम निर्माण की घोषणा की थी। जिसके निमित ही लगभग 8 करोड़ का कार्य वहां अब तक हो गया है, लिहाजा यदि किसी को कोई दिक्कत थी तो शिकायत दर्ज करने के कई तरीके होते हैं। उसपर न्यायलय जाने का विकल्प भी खुला था, लेकिन सरकारी संपत्ति में तोड़फोड़ को किसी भी तरह से जायज नहीं ठहराया जा सकता है। लिहाजा जनता को भी राजनैतिक लाभ की दृष्टि से उकसाने वाले लोगों से सावधान रहने की जरूरत है।

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